आज के समय में जब ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि आज लड़कियां अपने अधिकार का गलत प्रयोग करती है ऐसे में पिंक जैसी मूवी हमें एक नयी दृष्टि प्रदान करती है.
" समकालीन समय में जब लड़कियों के साथ आए दिन कोई न कोई घटना होती रहती है ऐसे में पिंक जैसी कुछ मूवी हमें ये बताने की कोशिश करती है आज भी क ई मीनल जैसी लड़कियां है जिनको इंसाफ नहीं मिला क्योंकि जिन लोगों ने उनके साथ गलत किया वो या तो किसी विधायक के बेटे हैं या खुद कोई अमीर विधायक जो पैसे के दम पर सबका मुंह बंद कर देते है."
संविधान की दृष्टि से देखे तो अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता का अधिकार देता है जिसके अनुसार कानून के समक्ष कोई बड़ा या छोटा नहीं है.
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार देता है जिसमें
बंदी प्रत्यक्षीकरण - जिसका अर्थ व्यक्ति को किस कारण से गिरफ्तार किया है न्यायालय में कारण बताना होगा और अगर पुलिस ये सिध्द न कर पायी कि वो दोषी है तो उसे छोड़ना होगा.
आज आवश्यकता है एक बार फिर से संविधान को जानने और समझने की .
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