फिर क्यों तुम उदास हो।

थोड़ा ही लेकिन तुम क्यों उदास हो
थोड़ी सी कोशिश से तुम क्यों निराश हो
एहसान मानों इस जिंदगी का कि तुम
अपनी मंजिल के इतने पास हो।
क्यों थकाकर बैठ गये हो तुम
इसलिये कि तुम सिर्फ उदास हो
जब मंजिल पास हो तो
मुश्किलों से घबराना कैसा
 समय तेरा है उनसे पीछा छूटाना कैसा।
तेरा जरा -जरा सी बातो से
बिखरा जाना कैसा।

Comments