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कुछ कहने से पहले

अकेलेपन में सिमटते हम

जब लक्ष्य बड़े हो, प्राथमिकता तय करनी पड़ती है

मौन वो शक्ति है

ज्ञानी तो रावण भी था

जब बात रावण की हो तब समझना जरूरी हो जाता है

रामचंद्र कह गए सिया से

उन्हें पंख दे दो

त्यौहार जैसे हमें याद दिलाता है

सफलता के लिए जरूरी है सहनशीलता

जब सवाल मानवता का हो

अक्सर परिस्थितियां गलत होती है इंसान नहीं

तु ही शक्ति तु काली है